शिक्षक पर निबंध

यहाँ कक्षा 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के लिए शिक्षक पर निबंध लिखा गया है। शिक्षक पर निबंध लिखने से पहले आपको इसकी रूपरेखा जरुर पढ़नी चाहिए ताकि आपको पता चल जाये कि यह निबंध किन-किन बिन्दुओ के आधार पर लिखा गया है।

शिक्षक पर निबंध की रूपरेखा

शिक्षक पर निबंध की रूपरेखा

प्रस्तावना

शिक्षक के बारे में कोई प्रसिद्ध व्यक्ति का कोई कोट्स लिखना है और उसे समझाना है।

मुख्य भाग

एक शिक्षक कौन होता है और उसका का कार्य होता है।

शिक्षक के कर्तव्य क्या-क्या है।

शिक्षक दिवस क्यों और कब मनाया जाता है।

देश और दुनिया को खुशहाल बनाने के लिए शिक्षको का क्या योगदान है।

प्राचीन भारत के महान शिक्षको के बारे में लिखे।

उपसंहार

देश के विकास के लिए अच्छे शिक्षको का होना क्यों जरुरी है।  

शिक्षक पर छोटे और बड़े निबंध Long and Short Essay on Teacher in hindi

निबंध 1 (150 शब्द)

एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव छात्रों के जीवन से कभी नही मिट सकता। किसी भी देश का निर्माण उसके शिक्षक ही करते है। एक अच्छा शिक्षक छात्रों के लिए माता-पिता, गुरु, गाइड और एक दोस्त की तरह होता है जो उन्हें जीवन में हर प्रकार की मुसीबत से लड़ने के काबिल बनाता है।

शिक्षक वह है जो सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक अनुकूल वातावरण का निर्माण करता है। किसी भी क्षेत्र में ज्ञान हासिल करने के लिए एक अनुकूल वातावरण की जरुरत होती है। उसके बिना कुछ भी सीखना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए छात्रों में भी अपने शिक्षक के प्रति श्रद्धा भाव होना चाहिए।

शिक्षक सिर्फ स्कूल और कॉलेज में ही नही होते बल्कि क्रिकेट, फुटबॉल और किसी भी प्रकार का खेल सीखाने वाले भी शिक्षक ही होते है बल्कि हर वह व्यक्ति जिससे आप अपने जीवन में कुछ ना कुछ सीखते है वह भी शिक्षक है। असफलता को जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक माना जाता है। हमें शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए।

निबंध 2 (300 शब्द)

महान दार्शनिक अरस्तु ने कहा था – “जन्म देने वाले से ज्यादा सम्मान शिक्षको का होना चाहिए क्योंकि उन्होंने तो हमें सिर्फ जन्म दिया है बल्कि शिक्षक ने हमें जीना सिखाया है”। शिक्षक ही देश के भविष्य का निर्माण करते है। शिक्षक ही हमें हमारे नैतिक कर्तव्य और अधिकारों के बारे में सीखाते है।

महान शिक्षक छात्रों को पढ़ाते नही बल्कि सिखाते है। पढ़ाने और सिखाने में बहुत फर्क होता है। अच्छाई और बुराई को समझने का नजरिया विकसित करते है। एक अच्छा शिक्षक छात्रों में अपने जीवन लक्ष्य को खोजने की काबिलियत पैदा करता है।

शिक्षक हमें जीवन चलाने के लिए धन कमाने के काबिल तो बनाते ही है इसके साथ-साथ जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करते है। कुछ छात्रों में अपने रंग, रूप और शारीरिक आकार को लेकर हीन भावना होती है। शिक्षक देश और दुनिया के बड़े व्यक्तियों का उदाहरण देकर उनकी हीन भावना को दूर करने का प्रयास करते है।

शिक्षक समाज का आईना होते है। अगर शिक्षक ना हो तो समाज में बहुत सारी कुरुतियाँ फैल जायेंगी और फिर उस देश का पतन होने से कोई नही रोक सकता। इसलिए हमें शिक्षको का सम्मान करना चाहिए और उन्हें नई पीढ़ी को शिक्षित करने का उचित माहौल देना चाहिए।  

शिक्षको द्वारा दिया गया ज्ञान जीवन भर हमारे साथ रहता है। प्राचीन भारत में भी द्रोणाचार्य, आचार्य चाणक्य जैसे कई महान शिक्षक हुए है। जिन्होंने साधारण बालकों को शिक्षा देकर इस काबिल बनाया कि बड़े होकर उन्होंने कई महान राजाओ को भी हरा दिया। 

आज बहुत सारे शिक्षक ऐसे हो गये है जो शिक्षक नाम को कलंकित करने का कार्य कर रहे है। ऐसे शिक्षको को कठोर सजा देकर समाज से बहिस्कृत कर देना चाहिए। आज भी देश और दुनिया को महान शिक्षको की आवश्यकता है जो उमंग और निस्वार्थ भाव से युवा पीढ़ी को देश का विकास करने के काबिल बना सके।    

निबंध 3 (600 शब्द)

प्रस्तावना

शिक्षक में दो गुण होते है एक जो आपको डराकर नियमो ने बांधकर एक सटीक इन्सान बनाते है और दूसरा जो आपको खुले आसमान में उड़ने के लिए छोड़ कर आपका मार्ग प्रशस्त करते है। भारतीय समाज में शिक्षक को माता-पिता से भी बड़ा दर्जा दिया गया है।

शिक्षक का महत्व

किसी भी देश का विकास वहां के शिक्षको पर निर्भर करता है। शिक्षक ज्ञान, स्मृद्धि और प्रकाश का बड़ा स्त्रोत होता है। शिक्षक बच्चो को सीखाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है। हमारे आचार और व्यवहार पर शिक्षको का बहुत प्रभाव पड़ता है।    

प्रत्येक छात्र की अलग-अलग विषयो में रूचि होती है। शिक्षक उनकी रूचि के अनुसार उन्हें आगे बढ़ने के लिए गाइड करते है और जरुरत पड़ने पर सहायता भी करते है। शिक्षक अपने छात्रों में सृजनात्मकता और ज्ञान का आनंद पैदा करता है। बच्चे उसी शिक्षक को पसंद करते है जो पढ़ाई को बहुत ही आसान बनाकर मजाकिया तरीके से पढ़ाता है। छात्रों को अधिक से अधिक सीखने और आगे बढ़ने के लिए शिक्षक हमेशा प्रेरित करता है।

शिक्षक दिवस

प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रपति बनने से पहले डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी एक शिक्षक थे। इसीलिए उनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

शिक्षक दिवस देश के सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन छात्र ही अपनी कक्षा में शिक्षक की भूमिका निभाते है।  

शिक्षक के कर्तव्य   

छात्रों के पढ़ने के लिए एक सुविधापूर्ण माहौल को तैयार करना एक शिक्षक का कर्तव्य होता है।

शिक्षक को छात्रों को उनकी कमियों को दूर करने में मदद करनी चाहिए।       

प्रत्येक छात्र की अलग-अलग क्षेत्र में रूचि होती है एक शिक्षक को उनकी रूचि पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए।   

आदर्श शिक्षक के गुण

एक आदर्श शिक्षक समय पर स्कूल आता है। शिक्षण को प्रभावी बनाने वाली शिक्षण सहायक सामग्रियों का भरपूर उपयोग करता है, छात्रों से मधुर सम्बन्ध रखता है, उन्हें प्रोत्साहित करता है तथा अपने साथियों से मित्रता पूर्ण व्यवहार रखता है।

एक आदर्श शिक्षक अनुशासित होता है, उसे अपने विषय के साथ-साथ मनोविज्ञान का भी ज्ञान होता है, बच्चो को सही गलत में फर्क बताने में सक्षम, शिक्षा के प्रति समर्पित और एक अच्छा श्रोता भी होता है।

रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था – “एक जलता हुआ दीपक ही दुसरे दीपक को जला सकता है” मतलब वही शिक्षक बच्चो को सही ढंग से पढ़ा सकता है जो जीवन भर खुद भी नया सीखता रहे। इसलिए एक आदर्श शिक्षक बच्चो को सिखाने के साथ-साथ जीवन भर खुद भी सीखता रहता है।

प्राचीन भारत के महान शिक्षक

भारतीय इतिहास में द्रोणाचार्य और आचर्य चाणक्य जैसे महान शिक्षक हुए है। द्रोणाचार्य ने महाभारत के अर्जुन को विश्व का सबसे बढ़िया धनुर्धर बनाया था और आचर्य चाणक्य ने एक छोटे से बच्चे (चन्द्रगुप्त) को शिक्षा दी जो आगे चलकर भारत का महान राजा बना था।

एक शिक्षक की महानता सीखाने में नही है बल्कि छात्र को क्या सीखना चाहिए यह सीखाने में है। छात्र की रूचि को पहचानकर उसे उसी में पारंगत करना चाहिए, द्रोणाचार्य और आचर्य चाणक्य ने भी ऐसा ही किया था।

उपसंहार

एक शिक्षक ही समृद्ध समाज का निर्माता है। शिक्षक ही हमारे अंदर देश-भक्ति की भावना, नैतिक कर्तव्य को पालन करना और अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीखाते है। शिक्षक को अपने विषय का कम ज्ञान हो सकता है लेकिन शिक्षक कभी भी बुरा नही हो सकता। हमें अपने शिक्षको का सम्मान करना चाहिए।

आज प्रत्येक समाज में शिक्षको को और अधिक सम्मान और आदर देने की जरुरत है। हमारे मन में शिक्षको के प्रति श्रद्धा भाव होना चाहिए।            

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