अनुशासन पर निबंध

सफल होने के लिए क्या करना चाहिए यह सभी लोग जानते है लेकिन सफलता के लिए कितना अनुशासित होना चाहिए यह बहुत कम लोग जानते है। यहाँ कक्षा 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के अनुशासन पर निबंध लिखा गया है

अगर आप अपनी भाषा में अनुशासन पर निबंध लिखना चाहते है तो मैं आपको इसकी रूपरेखा बता देता हूँ जिससे आपको एक बेसिक आईडिया मिल जायेगा कि अनुशासन पर निबंध लिखने के लिए आपको किन-किन बिन्दुओं को शामिल करना होगा

अनुशासन पर निबंध की रूपरेखा

प्रस्तावना

प्रस्तावना में आपको कोई ऐसा कोट्स, कहावत या किसी महान इंसान के विचार लिखने है जो अनुशासन का महत्व समझाते हो तथा इसके साथ आपको अनुशासन की परिभाषा भी बतानी है।

मुख्य भाग

अनुशासन को थोडा विस्तार से समझाए।

जीवन में अनुशासन की शुरुआत कहाँ से होती है और इसे जीवन में कैसे उतारा जा सकता है।

अनुशासन के फायदे क्या-क्या है उदाहरण सहित व्याख्या करें।

अनुशासन से देश, दुनिया और समाज पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अनुशासनहीनता के क्या-क्या कारण है और उनसे समाज को क्या नुकसान उठाना पड़ता है।

उपसंहार

अनुशासनहीनता को कैसे दूर किया जा सकता है और बच्चों को अनुशासित करने के कौन-कौन से तरीके अपनाये जा सकते है इसके बारे में अपने सुझाव दें।

अनुशासन पर छोटे और बड़े निबंध [Short and Long Essay on Anushasan in hindi]

निबंध 1 (150 शब्द)  

अनुशासन का अर्थ होता है किसी शासन या नियम के पीछे चलना। किसी महान इन्सान ने कहा है कि “सफल होने के लिए हमें दूसरो से ज्यादा बुद्धिमान होने कि जरुरत नही है बल्कि ज्यादा अनुशासित होने की जरुरत है” इस बात से यह पता लगाया जा सकता है कि हमारे जीवन में अनुशासन का कितना महत्व है।

आप जिस कार्य में सफलता हासिल करना चाहते है उसी कार्य को रोजाना सही ढंग से करना और निश्चित समय अन्तराल में पूरा करना ही अनुशासन कहलाता है। जैसे एक विद्यार्थी के लिए रोजाना पढाई करना अनुशासन है, एक खिलाड़ी के लिए रोजाना मैदान में प्रैक्टिस करना अनुशासन है, देश के नागरिको के द्वारा सरकारी कानूनों का पालन करना ही अनुशासन है, ड्राईवर का रेड लाइट सिग्नल पर रुक जाना ही अनुशासन है।

लेकिन ऐसे बहुत से कारण है जिसकी वजह से समाज में अनुशासनहीनता बढ़ गई है। जैसे मोबाइल, इन्टरनेट, टेलीविज़न, राजनीती आदि। इन सभी का सही तरीके के इस्तेमाल करके ही अनुशासन को कायम रखा जा सकता है।

निबंध 2 (300 शब्द)

जीवन में किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें अनुशासित रहकर कठोर परिश्रम करने की जरुरत है। अनुशासन “अनु+शासन” से बना है जिसका अर्थ है – किसी अच्छे शासन (नियम) का अनुसरण करना। माता-पिता और गुरुजनों के आदेशानुसार चलाना ही अनुशासन कहलाता है अर्थात स्वयं को नियंत्रण में रखना ही अनुशासन है।

किसी भी देश के शासकीय कानून का पालन करना, सामाजिक मान्यताओं का सम्मान करना और स्वस्थ रहने के लिए शारीरिक नियमो का पालन करना भी अनुशासन के अंतर्गत आता है। सामान्य रुप से कहें तो व्यक्ति जहाँ रहता है वहां के नियम, कानून और सामाजिक मान्यताओं के अनुरूप आचरण करना ही अनुशासन कहलाता है।  

अगर खेल के मैदान में कैप्टेन खुद अनुशासित नही रहेगा तो टीम के खिलाडियों से अनुशासन की आशा करना व्यर्थ है। अगर टीम अनुशासित नही है तो उसे हार से कोई नही बचा सकता। अगर देश कि सीमा पर तैनात सैनिकों  का कैप्टेन ही अनुशासित नही है तो उसकी सैन्य टुकड़ी कभी अनुशासित नही रह सकती।   

एक बच्चे का जीवन उसके परिवार से शुरु होता है। अगर परिवार के लोग ही गलत आचरण करते है तो बच्चा भी उनका अनुसरण करेगा। परिवार के बाद बच्चा समाज से सीखता है और आज के समय ऐसे बहुत सारे तरीके है जो समाज में अनुशासनहीनता फैला रहे है। जैसे इन्टरनेट, मोबाइल, टेलीविज़न, फिल्मे, न्यूज़ पेपर, विद्याथिर्यो के द्वारा होने वाले विरोध प्रदर्शन, परीक्षा में नक़ल, शिक्षको से बदसलूकी आदि।  

समाज में अनुशासनहीनता को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए। विद्यार्थियों को कड़ी सजा देनी चाहिए। अनुशासनहीनता फैलाने वाले कारको का उपयोग सीमित कर देना चाहिए। देश के विकास के लिए उसके नागरिको का अनुशासित होना बहुत जरुरी है। अनुशासन ही देश को महान बनता है। जब हम स्वयं अनुशासित रखेंगे तभी दूसरो को अनुशासित रख सकेंगे।

निबंध 3 (600 शब्द)

प्रस्तावना

भगवान बुद्ध ने अनुशासन के महत्व को समझाते हुए कहा था कि “उत्तम स्वास्थ्य का आनंद लेने के लिए, परिवार में खुशी लाने के लिए और सबको शांति प्रदान करने के लिए सबसे पहले खुद को अनुशासित बनने और अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण करने की जरुरत है” अनुशासन शब्द शासन में “अनु” उपसर्ग लगने से बना है। अनुशासन का शाब्दिक अर्थ होता है – शासन के पीछे चलना। विद्यार्थी जीवन में माता-पिता और गुरुजनों के आदेश के अनुसार कार्य करना ही अनुशासन कहलाता है।

जैसा कि प्रारम्भ में बताया गया है अनुशासन का मतलब होता है – शासन के पीछे चलना। इस अर्थ से देखा जाए तो जैसा शासन होगा वैसा ही अनुशासन होगा। अगर कही अनुशासनहीनता फैली हुई है तो कहीं ना कहीं वहां का शासन भी इसके लिए जिम्मेदार है। जैसे अगर घर के मुखिया का शासन सही नही है तो घर में हमेशा अव्यवस्था फैली रहेगी, अगर राजनेता देश के कानून का पालन नही करेंगे तो देश के नागरिको से भी इसकी उम्मीद नही की जा सकती।

बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका परिवार होता है। जैसा परिवार का माहौल होगा वैसा ही बच्चे का आचरण होगा। परिवार के बाद बच्चा अपने समाज और स्कूल से सीखता है। अगर समाज के लोगों और स्कूल के टीचर का आचरण सही नही होगा तो निश्चित रुप से बच्चे का आचरण भी वैसा ही होगा। इसलिए परिवार के बड़ो के लिए जरुरी है कि वें अपने आचरण में सुधर करें और स्वयं अनुशासित रहते हुए बच्चों को भी अनुशासन का महत्व बताए।

अनुशासन की शिक्षा बच्चपन में ही दी जानी चाहिए क्योंकि एक बार आचरण बनने के बाद उसे बदलना बहुत मुश्किल होता है। अनुशासनहीनता के कारण समाज में बहुत सारी बुराईया जड़ पकड़ कर लेती है। वर्तमान में अनुशासनहीनता फ़ैलाने वाले बहुत सारे तरीके पैदा हो गये है। जैसे इन्टरनेट, मोबाइल, टेलीविज़न, न्यूज़ पेपर आदि। इन सभी तरीकों के द्वारा नेगेटिव और हिंसक बातों को समाज में बहुत जल्दी फैलाया जा सकता है। परिणाम स्वरूप जनता सारे नियम-कायदों को ताक पर रखकर विद्रोह करने पर उत्तर आती है। जिन देशों में कानून व्यवस्था सख्त होती है वहां अनुशासनहीनता बहुत कम देखने को मिलती है।

जीवन में अनुशासित होना थोडा मुश्किल काम है। लेकिन व्यक्ति एक बार अनुशासन का महत्व समझ जाता है तो वह जीवन में बड़ी से बड़ी मुश्किलों को भी आसानी से पार कर लेता है। संसार में जितने भी महान इन्सान हुए है उनको देखकर एक बात समझ आती है कि “जीवन में महानता हासिल करने के लिए एक ही काम को अनुशासित रहते हुए बार-बार करना होता है”।   

उदाहरण के लिए महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर एक-एक शॉट खेलने कि हजारों बार प्रैक्टिस करते थे, ओलिंपिक में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले महान तैराक माईकल फिलिप्स दिन में 12 घंटो तक पानी में तैरने की प्रैक्टिस करते थे। अनुशासन ही वह आधारशिला है जिस पर सपने के महल खड़े किये जा सकते है। अमीर और गरीब इन्सान में सबसे बड़ा अंतर अनुशासन का होता है। एक गरीब इन्सान भी अनुशासन के साथ कार्य करके अमीर बन सकता है।

अनुशासन से भी एक स्टेप आगे आता है, आत्म-अनुशासन। आत्म-अनुशासन का मतलब होता है कि अकेले में भी किसी कार्य को उसी ढंग से करना जैसे आपको कोई देख रहा हो। कक्षा में टीचर की उपस्थिति में सभी बच्चे अनुशासित रहे सकते है लेकिन जब टीचर कक्षा में ना हो उस वक्त अनुशासित रहना ही आत्म-अनुशासन कहलाता है।

उपसंहार

किसी भी देश का विकास उस देश के नागरिको के अनुशासन पर निर्भर करता है। इसके लिए जरुरी है कि हम सबसे पहले खुद को अनुशासित करें तभी हम दूसरो को अनुशासित रख सकते है। देश और समाज में अनुशासनहीनता फ़ैलाने वाले कारको पर लगाम लगानी होगी तभी हम समाज और भारत माता के प्रति अपना कर्ज चुका पाएंगे।  

इंटरनेट पर निबंध Essay on Internet in Hindi

समाचार पत्र पर निबंध Essay on News Paper in Hindi

सूखा पर निबंध Essay on Drought in hindi

गाय पर निबंध Essay on cow in hindi

एपीजे अब्दुल कलाम पर निबंध Essay on APJ Abdul kalam in hindi

लाल बहादुर शास्त्री पर निबंध Essay on Lal Bahadur Shastri in hindi

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow Us

Follow us on Facebook
error: Content is protected !!