योग पर निबंध

यहाँ कक्षा 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के लिए योग पर निबंध लिखा गया है योग पर निबंध लिखने से पहले आपको इसकी रूपरेखा जरुर पढ़नी चाहिए ताकि आपको पता चल जाये कि योग पर निबंध किन-किन बिन्दुओ के आधार पर लिखा गया है

योग पर निबंध की रूपरेखा

योग पर निबंध की रूपरेखा

प्रस्तावना

यहाँ आपको योग क्या है और कैसे शुरू हुआ इसके बारे में लिखना है

मुख्य भाग

योग का इतिहास  

योग के प्रकार और योग कैसे करते है

योग के फायदे

अंतराष्ट्रीय स्तर पर योग का महत्व और योग दिवस कैसे और कब शुरू हुआ

योग से देश, विदेश और समाज पर पड़ने वाला प्रभाव कैसा है

उपसंहार

योग को और कैसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए इसके बारे में कोई सुझाव दें   

योग पर छोटे और बड़े निबंध Short and Long Essay on Yoga in Hindi

निबंध 1 (150 शब्द)

योग एक कला है जो शरीर को दिमाग के साथ कनेक्ट करने का काम करती है। स्वस्थ रहने के लिए योग सबसे आसान और बढ़िया तरीका है इसलिए दुनिया भर में आज योग को काफी महत्व दिया जाता है। योग भारत की प्राचीन धरोहर है। योग का सूत्रधार “महर्षि पतंजली” को माना जाता है।

योग स्वयं को जानने की यात्रा है। योग का अर्थ होता है “जोड़ना”। इसके द्वारा शरीर, मन और आत्मा के मध्य संतुलन स्थापित किया जा सकता है। योग के अभ्यास से शरीर और दिमाग के बीच एक सम्बन्ध बन जाता है जिससे दोनों अनुशासन में रहते है। एक अनुशासित दिमाग के द्वारा जीवन में बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी हल किया जा सकता है।

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योग शारीरिक और मानसिक क्रिया है जो हमारे शरीर को निरोगी रखती है। प्रतिवर्ष 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योग अपने आप में एक सम्पूर्ण व्यायाम है। योग के निम्न प्रकार है – कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, राजयोग और हठयोग। योग के विभिन्न आसन और प्राणायाम से हमारा शरीर मजबूत बनता है।

निबंध 2 (300 शब्द)

योग प्राचीन भारतीय परम्परा और संस्कृति की अमूल्य देन है। हजारों वर्ष पहले योग की खोज महर्षि पतंजली ने की थी उन्होंने ही सबसे पहले यह बताया था कि योग के द्वारा हमारे मन, शरीर में सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। प्रतिवर्ष 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है।

योग का अर्थ होता है “जोड़ना” लेकिन योग का मुख्य अर्थ होता है “अनुशासन” शरीर के द्वारा अनुशासन में किया जाने वाला प्रत्येक काम योग कहलाता है। जैसे गहराई से स्वास लेना योग है, कमर सीधी करके बैठना भी योग है, पानी को बैठकर और घूंट-घूंट करके पीना भी योग है, संतुलित आहार और जरुरत से ज्यादा न खाना भी योग है।

योग अपने आप ने बहुत बड़ा विषय है। इसलिए योग को 5 भागो में बांटा गया है। जैसे कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, राजयोग व हठयोग। योग के विभिन्न आसन होते है। जैसे कपालभाती, ताड़ासन, सुखासन, शवासन, वीरभद्रासन आदि। शरीर के अलग-अलग अंगो के लिए अलग-अलग आसन होता है।

योगासन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है और शरीर रोगों से मुक्त रहता है। योग करने वाले व्यक्ति को कभी भी चिंता, क्रोध, भय, इर्ष्या आदि मानसिक विकारो का सामना नही करना पड़ता। प्रत्येक प्रकार की शारीरिक और मानसिक बीमारी को योग से ठीक किया जा सकता है। लेकिन फिर भी कुछ लोग ज्ञान की कमी के कारण ऐसा नही कर पाते।

योग का इतिहास लगभग 5000 साल पुराना है। भारत में शुरू किया गया योग आज दुनिया भर में काफी पसंद किया जाता है। प्रत्येक देश में आज ऐसे बहुत सारे इंस्टिट्यूट खुल गये है जहाँ रोजाना योग करवाया जाता है। योग शुरू करने की कोई उम्र नही होती है।

वैज्ञानिको ने भी रिसर्च के द्वारा यह पता लगाया है कि योग से अनगिनत फायदे होते है। लेकिन आज भी दुनिया कि बड़ी-बड़ी मेडिकल कंपनिया नही चाहती कि लोगो का योग की तरफ रुझान हो क्योंकि योग करने से लोग स्वस्थ रहेंगे और इससे उनकी दवाईयां नही बिकेंगी।

निबंध 3 (600 शब्द)

“शरीर को स्वस्थ रखने के लिए मेहनत करनी पड़ती है जबकि दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए उसे आराम देना पड़ता है” – (अज्ञात) योग ही वह क्रिया है जिसके द्वारा ये दोनों बातें एक साथ संभव हो सकती है। योग के द्वारा शरीर और दिमाग में सामंजस्य स्थापित किया जाता है जिससे आप अपने विचारों को वश में कर सकते है।

योग का इतिहास लगभग 5000 साल पुराना है। योग की शुरुआत भारत में ही हुई थी। महर्षि पतंजली को योग का जनक कहा जाता है। योग शब्द की उत्त्पत्ति संस्कृत के “युज” से हुई है। योग के दो अर्थ होते है पहला “जोड़ना” और दूसरा “अनुशासन”। हम शरीर के द्वारा अनुशासित ढंग से जो भी कार्य करते है वह योग बन जाता है। जैसे सुबह जल्दी उठाना योग है, सही समय पर भोजन करना भी योग है, दिन भर में उचित मात्रा में पानी पीना भी योग है, शांति से एक स्थान पर बैठना भी योग है।

योग के प्रकार

योग मुख्य रूप से 5 प्रकार के होते है। जैसे कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, राजयोग और हठयोग। साधारण शब्दों में कहे तो मोक्ष प्राप्ति के ये पांच तरीके है।

कर्मयोग – दूसरो की सेवा करना ही कर्मयोग है।

भक्तियोग – भक्तियोग मन का योग है। भगवान के प्रति मन में हमेशा श्रद्धा भाव रखना चाहिए।

ज्ञानयोग – इस योग में बुद्धि के विकास की आवश्यकता होती है।

राजयोग – इसके अंतर्गत धारणा, ध्यान और समाधी की प्रधानता रहती है।

हठयोग – आसन, प्राणायाम, मुद्राएँ आदि हठयोग के अंतर्गत आती है।

योग के 8 अंग होते है। यम (संकल्प लेना), नियम (आचरण या आत्म-अनुशासन), आसन, प्राणायाम (श्वासों पर नियंत्रण), प्रत्याहार (इन्द्रियों पर नियंत्रण), धारणा (एकाग्रता), ध्यान/मैडिटेशन और समाधी (मोक्ष)।

योग की शुरुआत आसन से होती है। लेकिन उससे पहले यम और नियम से गुजरकर साधक को परिशुद्ध होना पड़ता है। आसन के अभ्यास से शरीर और मन मजबूत होते है।

योग के लाभ

  • योग से शरीर मजबूत बनता है और लचीलापन आता है।
  • योग से पाचन शक्ति बढती है। जिससे मोटापा, कब्ज जैसे समस्यायों से छुटकारा मिलता है।
  • योग से शरीर में खून का सही से प्रवाह होता है और सुगर की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।
  • योग से मानसिक शांति मिलती है जिससे नींद अच्छी आती है।
  • योग से व्यक्ति अच्छाई और बुराई में फर्क करने के काबिल बनता है।
  • योग के द्वारा हम बड़ी से बड़ी शारीरिक समस्या को भी ठीक कर सकते है। कमर दर्द, विकलांगता, नसों से सम्बंधित समस्या आदि।
  • योग के द्वारा मानसिक समस्याए जैसे क्रोध, इर्ष्या, भय, चिंता आदि को भी हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म किया जा सकता है।

योग से सिर्फ शरीर और मन ही स्वस्थ नही रहते बल्कि यह व्यक्ति के मोक्ष का द्वार भी खोलता है। योग से जब व्यक्ति का मानसिक विकास होता है तो वह सही प्राणियों को सामान रूप से देखने लगता है और सभी के साथ अच्छा व्यवहार करता है यही से परमात्मा का द्वारा खुलता है। मोक्ष प्राप्ति के लिए आपको पहले मन, बुद्धि और कर्म से पवित्र होना पड़ता है और ऐसा करने में योग आपकी मदद करता है।

अंतराष्ट्रीय योग दिवस

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग की महिमा का मंडन किया था। उसके बाद 21 जून को सम्पूर्ण विश्व में योग दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया।

प्रत्येक वर्ष 21 जून को पूरी दुनिया के अलग-अलग शहरों में लोग एक साथ योग करते है। इसी दिन भारत के भी सभी शहरों में सामूहिक रूप से योग का आयोजन किया जाता है।

उपसंहार

योग के अनेक लाभ है जिनको गिनाया नही जा सकता। योग भगवान द्वारा मनुष्य को दिया गया एक वरदान है। यह किसी चमत्कार से कम नही है कि आज विज्ञान के पास जिन बीमारियों का ईलाज नही है योग के द्वारा उन सभी बीमारियों को भी ठीक किया जा सकता है।

दुनिया के सभी देशों की सरकारों को योग को बढ़ावा देना चाहिए। सभी स्कूल और कॉलेजो में सप्ताह में कम से कम एक दिन योग जरुर करवाना चाहिए।

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