वर्साय की संधि : प्रावधान, गुण, दोष

प्रथम विश्व युद्ध में लगभग 37 देशों के 6 करोड़ 50 लाख सैनिको ने भाग लिया था। जिसमे से 1 करोड़ सैनिक शहीद हुए, 70 लाख आम नागरिक मारे गये थे और लगभग 2 करोड़ लोग घायल हुए थे।

प्रथम विश्व युद्ध में पूरी दुनिया में भयंकर तबाही हुई थी। ऐसी तबाही दोबारा ना हो इसके लिए पूरी दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए सभी मित्र देशों ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में 18 जनवरी 1919 को शांति सम्मलेन का आयोजन किया।

इस आयोजन में सिर्फ उन्हीं देशों (मित्र राष्ट्र) को बुलाया गया था। जिनको प्रथम विश्व युद्ध में विजय प्राप्त हुई थी। इस सम्मलेन में लगभग 32 देशों के 70 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।

रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, तुर्की और बुल्गेरिया को इस शांति सम्मलेन में नही बुलाया गया।  

इस शांति सम्मलेन मुख्य रूप से 3 बातों पर ध्यान दिया गया था।

  1. जिन देशों पर जर्मनी ने कब्ज़ा किया है उन्हें आजाद करवाया जाये।
  2. राष्ट्र संघ की स्थापना की जाये जो सभी देशों पर नजर रखे।
  3. युद्ध के कारण हुए नुकसान को जर्मनी से वसूला जाये।

पेरिस शांति समझौता (1919)

पेरिस के शांति सम्मलेन में सभी पराजित देशों को प्रथम विश्व युद्ध शुरू करने का दोषी माना गया और सभी के साथ अलग-अलग संधियां की गयी। इन सभी संधियों में वर्साय की संधि सबसे महत्वपूर्ण है।

  • जर्मनी के साथ वर्साय की संधि
  • ऑस्ट्रिया के साथ सेंट जर्मन की संधि
  • बुल्गेरिया के साथ न्यूइली की संधि
  • हंगरी के साथ ट्रियनों की संधि
  • तुर्की के साथ सेव्रे की संधि

वर्साय की संधि (Treaty of Versailles in hindi)

वर्साय की संधि की शर्तो को तैयार करने में लगभग 4 माह का समय लगा। इसमें कुल 230 पेज थे। जर्मनी के राष्ट्रपति “कैसर विल्हेम द्वितीय” प्रथम विश्व युद्ध में हार मिलने के कारण अपने देश से डरकर भाग गये थे।

इस कारण मई 1919 में यह संधि जर्मनी के प्रधानमंत्री “फ़िलिप शीइडमन” के सामने पेश की गई। उन्होंने इस संधि पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया क्योंकि इस संधि में जर्मनी के ऊपर बहुत ही भयानक प्रतिबंद लगाये गये थे यदि वे इस पर अपने हस्ताक्षर करते है तो उनका देश पूरी तरह बर्बाद हो जायेगा इस कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।     

इसके बाद मई 1919 में जर्मनी के विदेश मंत्री “हर्मन मूलर” के सामने वर्साय की संधि की शर्ते पेश की गयी और कहा गया कि यदि जर्मनी इस संधि पर अपने हस्ताक्षर नही करता है तो वह युद्ध के लिए तैयार हो जाये। 

अंत में 28 जून 1919 को जर्मनी के साथ वर्साय की संधि होती है इस संधि पर जर्मनी के अधिकारियो ने अपने हस्ताक्षर किये थे। एक तरीके से वर्साय की संधि को जर्मनी पर जबरदस्ती थोपा गया था।  

वर्साय की संधि की प्रावधान

वर्साय की संधि में जो भी प्रावधान थे उनको जर्मनी को मानना पड़ा। वर्साय की संधि करने का मतलब था जर्मनी को पूरी तरह से बर्बाद कर देना। वर्साय की संधि की में 3 प्रावधान थे मतलब जर्मनी पर तीन प्रकार के प्रतिबंध लगाना

  1. प्रादेशिक प्रावधान
  2. आर्थिक प्रावधान
  3. सैनिक प्रावधान

1. प्रादेशिक प्रावधान

  • जर्मनी के अल्सेस-लारेन नामक क्षेत्र में बहुत सारी खनिज संपदा थी इसे फ्रांस को दे दिया गया।  
  • जर्मनी एक बहुत बड़ा देश था इसे तोड़कर कुल 7 देश बना दिए गये। जिनके नाम है – बेल्जियम, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, लिथुवानिया, लात्विया एस्थोनिया।
  • जर्मनी की “राईन” मुख्य नदी थी इस नदी के क्षेत्र को सेना रहित घोषित कर दिया गया।
  • जर्मनी की “कील नहर” को अंतर्राष्ट्रीय नहर घोषित कर दिया गया।       
  • चीन के शांतुंग क्षेत्र के सभी अधिकार जापान को सौप दिए गये।
  • जर्मनी के ड़ेंजिग बंदरगाह को छीनकर पोलैंड को दे दिया गया।
  • जर्मनी का मेमल बंदरगाह छीनकर लिथुआनिया को दे दिया गया।
  • सार घाटी पर अब फ्रांस का अधिकार होगा जोकि जर्मनी में स्थित थी।      

2. आर्थिक प्रावधान

  • प्रथम विश्व युद्ध शुरू करने का आरोप जर्मनी पर लगाया गया और उस पर हर्जाने के तौर पर 5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया।
  • जर्मनी के सभी उपनिवेशों को छीनकर मित्र देशों ने आपस में बाँट लिया तथा उपनिवेशको में जो भी जर्मन पूंजी लगी थी उसे भी जप्त कर लिया गया।
  • जर्मनी को राष्ट्र संघ आयोग की देखरेख में शासन करने के लिए बाध्य किया गया।  
  • वर्साय की संधि के कारण जर्मनी का 10% आबादी क्षेत्र, 15% कृषि क्षेत्र, 15% मवेशी, 75% लोह अयस्क क्षेत्र, 26% कोयला क्षेत्र उसके हाथ से चला गया।

3. सैनिक प्रावधान

  • जर्मनी के राइनलैंड प्रदेश में अगले 15 वर्षो तक मित्र राष्ट्रों की सेना रखने का फैसला किया गया ताकि जर्मनी के ऊपर नजर रखी जा सके।    
  • जर्मनी की सेना में सैनिको की संख्या 1 लाख सीमित कर दी गई। वह इससे ज्यादा सैनिक नही रख सकता तथा कोई भी सैनिक 25 वर्ष नौकरी करने से पहले सेना से रिटायर नही हो सकता था ताकि सेना में कम से कम लोग भर्ती हो सके।
  • जर्मनी अब अपनी जल सेना (नेवी) में केवल 15 हज़ार सैनिक ही रख सकता था।
  • जर्मनी में प्रत्येक व्यक्ति को 18 वर्ष की आयु के बाद सेना में एक साल के लिए भर्ती होना पड़ता था। इस नियम को खत्म कर दिया गया।
  • जर्मनी पर युद्ध सामग्री के निर्माण और आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया।  
  • जर्मनी के 1600 से अधिक व्यापारिक जहाजो पर मित्र राष्ट्रों ने कब्ज़ा कर लिया। 

निष्कर्ष

वर्साय की संधि (Treaty of Versailles) के कारण जर्मनी के लोगो में भयंकर आक्रोश फैल गया। उनमे बदले की भावना में जन्म ले लिया वर्साय की संधि का विरोध करने वालो में हिटलर सबसे आगे था। वह इन सबका बदला लेना चाहता था द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के कारणों में वर्साय की संधि सबसे बड़ा कारण था।  

अगर आपने प्रथम विश्व युद्ध के कारण और परिणाम के बारे में नही पढ़ा है तो जरुर पढ़े।

प्रथम विश्व युद्ध : कारण और परिणाम

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow Us

Follow us on Facebook
error: Content is protected !!