सूखा पर निबंध (कक्षा 1-12) | Essay on drought in hindi
वर्तमान में सूखा पुरे विश्व के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। बारिश की कमी के कारण सूखे के हालात पैदा होते है। सूखा पर निबंध में हमने सूखा क्या है, सूखा पड़ने के कारण, भारत और विश्व में सूखा पड़ने वाले स्थान, सूखा से होने वाले नुकसान तथा सूखे से निपटने के उपाय के बारे में चर्चा की है।
Table of Contents
सूखा पर छोटे और बड़े निबंध [Short and Long Essay on Drought in Hindi]
1. सूखा पर निबंध (300 शब्द)
किसी राज्य या देश में बारिश ही पानी का मुख्य स्रोत हो और वहां लंबे समय तक सामान्य से कम बारिश हो तो वह सूखा ग्रस्त क्षेत्र कहलाता है। जिन राज्यों या स्थानों पर नदियों की कमी है वहा बारिश ही पानी का मुख्य स्रोत होती है। मौसम के आधार पर भारत में काफी विविद्तायें है यहाँ एक स्थान पर गर्मी पड़ती है तो दुसरे स्थान पर बर्फ गिरती है, एक स्थान पर सूखा पड़ता है तो दुसरे स्थान पर भयंकर बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगर किसी राज्य में सामान्य से 50% कम बारिश होती है तो वह राज्य सूखा ग्रस्त राज्य कहलाएगा। भारत सरकार के द्वारा 15 राज्यों के लगभग 100 जिलों को सूखे की संभावना वाले स्थानों की सूची में रखा गया है जिसमें अधिकांश जिले पश्चिमी राजस्थान, पश्चिमी गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश के अंतर्गत आते है।
पूर्वी भारत के कुछ राज्य ऐसे भी है जहाँ हर वर्ष औसत से ज्यादा बारिश होती है। जैसे – असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड आदि। यह भी एक Irony है कि जिस देश (भारत) में दुनिया का सबसे अधिक बारिश वाला स्थान “मासिनराम” (मेघालय) स्थित है उसी देश के 100 से अधिक जिले भयंकर सूखा ग्रस्त स्थानों में सूचीबद्ध है।
सूखा पड़ने का एक मुख्य कारण है पानी के स्रोतों का सही तरीके से इस्तेमाल नही करना और पानी का अनावश्यक दोहन करना। सरकार को पानी के सही उपयोग के लिए लोगों को जागरूक करना चाहिए। हर घर में बारिश के पानी को टैंक बनाकर स्टोर करने अथवा उसे फिर से जमींन में डालने की व्यवस्था होनी चाहिए। घरों के व्यर्थ पानी को सड़क पर या खुले में ना बहाकर किसी गड्डे में डालना चाहिए ताकि वह वाष्प बनकर हवा में ना उड़े बल्कि जमीन में चला जाए।
2. सूखा पर निबंध (750 शब्द)
प्रस्तावना
लंबे समय तक बारिश कि कमी के कारण खेती के लिए और पीने के लिए पर्याप्त पानी ना होना ही सूखा कहलाता है। पानी के मुख्य प्राकृतिक स्रोत नदी, झरना, तालाब, बारिश आदि है। पश्चिमी भारत में ऐसे बहुत सारे राज्य है जहाँ केवल बारिश ही पानी का मुख्य स्रोत है। ऐसे में अगर वहां प्रति वर्ष सामान्य से कम बारिश होती है तो सूखा पड़ने के आसार काफी बढ़ जाते है।
सूखे की परिभाषा
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जिन स्थानों पर सामान्य से 75% कम बारिश होती है वे सामान्य सूखे के अंतर्गत आते है और जिन स्थानों पर सामान्य से 50% कम बारिश होती है वो भयंकर सूखे के अंर्तगत आते है। सूखा मुख्य रुप से 3 प्रकार का होता है मेट्रोलोजिकल सूखा, हाइड्रोलोजिकल सूखा और एग्रीकल्चरल सूखा।
मेट्रोलोजिकल सूखा : जब सामान्य से 50% कम बारिश होती है उसे मेट्रोलोजिकल सूखा कहते है।
हाइड्रोलोजिकल सूखा : जब जमीन में पानी का स्तर सामान्य से नीचे चला जाता है और कुओं में पानी की कमी हो जाती है तो उसे हाइड्रोलोजिकल सूखा कहते है।
एग्रीकल्चरल सूखा : जब लगातार एक महीने तक सामान्य से 50% कम बारिश होती है तो फसल में पानी की कमी हो जाती है इसलिए उसे एग्रीकल्चरल सूखा कहा जाता है।
भारत सरकार ने पुरे देश में लगभग 100 जिलों को भयंकर सूखे के संभावना वाले स्थानों की सूची में रखा है ये सभी जिले मुख्य रुप से राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, आन्ध्र प्रदेश के अंदर आते है। बारिश की कमी के कारण भारत का पश्चिमी भाग थार के मरुस्थल में बदल गया है। दुनिया का सबसे बड़ा मरुस्थल सहारा मरुस्थल है।
भारत में एक तरफ तो सूखा पड़ता है और दूसरी तरफ कुछ ऐसे स्थान भी है जहाँ आवश्यकता से अधिक बारिश होती है और बाढ़ जैसे हालत पैदा हो जाते है। दुनिया में सबसे अधिक औसत बारिश वाला स्थान मासिनराम (मेघालय) भारत में स्थित है। विश्व में सिर्फ भारत ही नही बल्कि बहुत सारे देश ऐसे है जो सूखे की समस्या से प्रभावित है जैसे पाकिस्तान, इराक, ईरान, सऊदी अरब, अफ्रीका महाद्वीप के कुछ देश और अमेरिका का कुछ हिस्सा भी सूखे से प्रभावित है।
सूखा पड़ने कि एक मुख्य वजह पानी का सही प्रकार से दोहन नही करना है हमारे पास पानी के जीतने स्रोत है हम उन सभी का आवश्यकता से ज्यादा इस्तेमाल करते है। इस कारण जिस वर्ष बारिश कम होती है उस वर्ष हमें सूखे का सामना करना पड़ता है।
देश कि भ्रष्ट सरकारे भी सूखे से निपटने के लिए पर्याप्त प्रयास नही करती है क्योंकि अगर सूखा पड़ता है तो सरकार को लोगों के लिए पानी, भोजन, पशुओ के लिए चारा आदि प्रकार कि सुविधायें मुहैया करवानी पड़ती जिसके लिए उन्हें केंद्र सरकार और विदेशों से करोड़ो रुपए मिलते है और उनको भ्रष्टाचार करने का एक और मौका मिल जाता है।
सूखा पड़ने का मुख्य कारण वर्षा की कमी, शुष्क मौसम, जलवायु परिवर्तन, पेड़ो का कटना है। जलवायु परिवर्तन के कारण प्रतिवर्ष असामान्य वर्षा लगातार बढ़ रही है। पेड़-पौधों की कमी के कारण भी बारिश के लिए हवा का उपयुक्त दबाव नही बन पाता जिस कारण पर्याप्त बरसात नही होती। भारत में 1871 से 2002 के बीच 22 बार भयंकर सूखा पड़ चुका है। जिसमे से 1987 का सूखा (Famine) सबसे भयंकर सूखा था। लोगों के पास खाने के लिए अनाज नही था इसलिए पेड़ो की छाल खाकर दिन गुजारे थे।
उपसंहार
सूखे से निपटने के लिए सरकार ने बहुत सारे प्रोग्राम और स्कीम चला रखी है लेकिन भ्रष्टाचार के कारण इनका सही तरीके से इम्प्लीमेंटेशन नही हो रहा है। जिन स्थानों का जमीनी जल स्तर जल्दी-जल्दी नीचे जा रहा है वहा टयूबवेल बनाने पर पाबंदी लगानी चाहिए। सरकार के द्वारा लोगों को पानी के सही इस्तेमाल करने और बरसात के पानी को टैंक बनाकर स्टोर करने के प्रति जागरुक करना चाहिए। घरो से निकलने वाले गंदे पानी को खेत में डालना चाहिए या जमीन में गड्डा खोदकर उसमे डालना चाहिए ताकि वह फिर से जमीन में जाकर पानी का लेवल बढ़ा सके।
गाड़ी धोने में ज्यादा पानी का इस्तेमाल नही करना चाहिए। फसलो को बूंद-बूंद सिंचाई के द्वारा पानी देना चाहिए। ज्यादा सूखे प्रभावित स्थानों में सरकार को कृत्रिम नहर बनाकर पानी पहुँचाना चाहिए। हवा से पानी को अवशोषित करने और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने के लिए वैज्ञानिको को बड़े स्तर पर नई तकनीको का अविष्कार करने की जरुरत है। जिन राज्यों में नदियों के कारण हर वर्ष बाढ़ आती है। उन नदियों के पानी को कृत्रिम रास्ता बनाकर सूखे स्थानों तक पहुँचाया जा सकता है। नदियों को आपस में जोड़कर भी एक स्थान से दुसरे स्थान तक पानी पहुँचाया जा सकता है।
इंटरनेट पर निबंध (कक्षा 1-12) Essay on Internet in Hindi
समाचार पत्र पर निबंध (कक्षा 1-12) Essay on News Paper in Hindi
गाय पर निबंध (कक्षा 1-12) Essay on cow in hindi
एपीजे अब्दुल कलाम पर निबंध (कक्षा 1-12) Essay on APJ Abdul kalam in hindi
लाल बहादुर शास्त्री पर निबंध (कक्षा 1-12) Essay on Lal Bahadur Shastri in hindi
Share