ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (कक्षा 1-12)

यहाँ आपके लिए ग्लोबल वार्मिंग पर छोटे और बड़े दोनों ही प्रकार के निबंध लिखे गये है। लेकिन उससे पहले मैं आपको ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध कैसे लिखना है इसकी रुपरेखा बता देता हूँ ताकि आपके अंदर भी निबंध लिखने की कला विकसित हो सके।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

ग्लोबल वार्मिंग निबंध की रूपरेखा

प्रस्तावना

प्रस्तावना की शुरुआत आप किसी कोट्स (जो ग्लोबल वार्मिंग को लेकर किसी खतरे को दर्शाता हो), ग्लोबल वार्मिंग के बारे में कोई रोचक तथ्य, कोई डाटा जो ग्लोबल वार्मिंग के महत्व को समझाता हो अथवा ग्लोबल वार्मिंग के बारे में 3 या 4 प्रश्न पूछ सकते है जिनका जवाब आपको निबंध के मुख्य भाग में देना होगा।

मुख्य भाग

ग्लोबल वार्मिंग क्या है

ग्लोबल वार्मिंग होने के कारण

ग्लोबल वार्मिंग से निजी, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले नुकसान

ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए क्या-क्या कदम उठाये जा रहे है

क्या विश्व स्तर पर ग्लोबल वार्मिंग को रोका जा सकता है या नही?   

उपसंहार

ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए आपके सुझाव   

ग्लोबल वार्मिंग पर छोटे और बड़े निबंध [Short and Long Essay in Hindi]

निबंध 1 (300 शब्द)

पृथ्वी की सतह का औसत तापमान बढ़ना ग्लोबल वार्मिंग कहलाता है। ग्लोबल वार्मिंग को हिंदी में वैश्विक तापमान कहते है। पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 15 डिग्री सेंटीग्रेड है और पिछले 100 वर्षो में यह तापमान 0.8 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ गया है। पृथ्वी पर जीवन के अनुकूल तापमान बनाए रखने का काम ग्रीन हाउस प्रभाव करता है

ग्रीन हाउस प्रभाव में निम्न गैसे है – पानी की वाष्प (H2O), कार्बन डाईऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) और ओजोन (O3) आदि। ग्रीन हाउस गैसों का पृथ्वी की सतह के ऊपर आवरण बना होता है। जब सूर्य की किरण पृथ्वी की सतह से टकराकर वापस लौटती है तो ये गैसे उसे रोक लेती है जिससे पृथ्वी का तापमान गर्म बना रहता है। अगर ये गैसे ना हो तो पूरी पृथ्वी का तापमान माइनस में रहेगा।

पिछले 100 वर्षो में हुए औधोगिक विकास, प्रदूषण, पेड़-पौधों के कटने, प्लास्टिक के इस्तेमाल, ज्वालामुखी विस्फोट आदि के कारण पृथ्वी पर ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता हो गई है। जिस कारण ये गैसे सूर्य की गर्मी को वायुमंडल से बाहर नही जाने देती और परिणाम स्वरूप पृथ्वी का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर की बर्फ पिघल रही है। जिस कारण समुंद्र और नदियों का जल स्तर बढ़ रहा है। जिससे बाढ़ और सुनामी आने के चांसेस बढ़ गये है। ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु परिवर्तन हो रहा है जिसके बहुत सारे दुष्प्रभाव सामने आ रहे है जैसे – मानसून की असमानता, फसलों का सही से विकास ना होना, मौसम और ऋतुओ का असामान्य होना, इन्सान और जानवरों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना आदि।

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए बहुत सारे देश मिलकर विश्व स्तर पर मीटिंग करते है जिसके सकारत्मक परिणाम सामने आ रहे है। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग को लेकर हमें व्यक्तिगत स्तर पर भी सीरियस होने की जरुरत है। प्रतिवर्ष अधिक से अधिक पेड़ लगाने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करने, प्लास्टिक का सीमित मात्रा में ही प्रयोग करने, कूड़ा-करकट को जलाकर नष्ट करने की बजाय रिसायकल करने की जरुरत है।

निबंध 2 (600 शब्द)

प्रस्तावना

अमेरिका की “नासा” अंतरिक्ष एजेंसी के एक अनुमान के मुताबिक अगर ग्लोबल वार्मिंग को नही रोका गया तो वर्ष 2050 तक पृथ्वी का औसत तापमान 1.5-2.0 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ जायेगा और वर्ष 2100 तक सुमंद्र का लेवल 1 से 8 फीट तक बढ़ जायेगा और उस समय पृथ्वी पर जीवन कैसा होगा इसका हम अनुमान भी नही लगा सकते। ग्लोबल वार्मिंग इंसान की तरक्की का ही एक दुष्परिणाम है।

ग्लोबल वार्मिंग क्या है

ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि के कारण पृथ्वी का औसत तापमान निरंतर बढ़ रहा है इसे ही ग्लोबल वार्मिंग कहते है। वर्तमान में पृथ्वी का औसत तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड है जो कि पिछले 100 वर्षो में लगभग 0.8 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ गया है। पृथ्वी पर वातावरण को जीवन के अनुकूल बनाने के लिए ग्रीन हाउस प्रभाव उत्तरदायी है। ग्रीन हाउस प्रभाव ना हो तो पृथ्वी पर हमेशा बर्फ जमी रहेगी और कोई भी जीवित नही रह पायेगा।

ग्रीन हाउस प्रभाव

ग्रीन हाउस प्रभाव पृथ्वी की सतह को गर्म रखने का एक प्राकृतिक प्रोसेस है। जब सूर्य की किरणे पृथ्वी की सतह से टकराकर वापस अंतरिक्ष में लौट रही होती है तो ग्रीन हाउस गैसे उन्हें कुछ मात्रा में रोक लेती है जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है। अगर ग्रीन हाउस गैस की मात्रा बढ़ जाएगी तो वे अधिक मात्रा में सूर्य की किरणों को रोकना शुरु कर देंगी और पृथ्वी का तापमान जरुरत से ज्यादा बढ़ जायेगा।

वर्ष 1824 में “जोसेफ फोरियर” ने सर्वप्रथम ग्रीन हाउस गैसों की खोज की थी। पानी की वाष्प (H2O), कार्बन डाईऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) और ओजोन (O3) आदि ग्रीन हाउस गैसे है। ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण कचरे को जलने से निकालने वाला धुँआ, वाहनों में ईंधन की खपत के कारण होने वाला प्रदूषण, पेड़-पौधों को काटने के कारण CO2 का ऑक्सीजन में ना बदलना, कारखानों से निकालने वाला धुँआ, रबर को जलाने से निकलने वाला कार्बन, ज्वालामुखी के कारण हवा में फैलने वाली राख, जंगलो में लगने वाली आग के कारण निकलने वाला धुँआ आदि है।

highest carbon emmision country
सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले देश

ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी और सभी जीवित प्राणियों पर इसका असर पड़ेगा। ग्लोबल वार्मिंग से पृथ्वी के औसत तापमान में व्रद्धि के कारण ग्लेशियर की बर्फ पिघलने लगेगी और समुंद्र का जल स्तर बढ़ जायेगा। जलवायु परिवर्तन के कारण सभी जीवित प्राणियों में रोग बढ़ने लग जायेंगे, पेड़-पौधों का जीवन काल कम हो जायेगा, कृषि की पैदावार कम हो जाएगी जिससे भूखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। ग्लोबल वार्मिंग से बाढ़ और अकाल जैसी घटनाये भी बढ़ जायेंगी।

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर बहुत सारे सम्मलेन हुए है। जैसे – 1972 का स्टॉकहोम पर्यावरण सरंक्षण सम्मेलन, 1992 रियो पृथ्वी सम्मेलन, 2015 का पेरिस समझौता आदि। जिनके सकारात्मक परिणाम भी अब सामने आ रहे है।

उपसंहार

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए हमें तीन स्तर पर प्रयास करने होंगे – वैश्विक स्तर, राष्ट्रीय स्तर और व्यक्तिगत स्तर पर। वैश्विक स्तर पर सभी देश एक दुसरे के साथ मिलकर योजना बना रहे है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भी सभी देशों को पेड़ लगाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करने के लिए अभियान चलाने चाहिए। व्यक्तिगत स्तर पर भी हमें AC के स्थान पर कूलर का इस्तेमाल करने, फ्रीज का सीमित इस्तेमाल करने, प्लास्टिक बैग के बजाय कपड़े के बैग का इस्तेमाल करना चाहिए।

 ग्लोबल वार्मिंग को कम करना पृथ्वी पर रहने वाले सभी इंसानों का दायित्व है। ग्लोबल वार्मिंग को लेकर हमें जल्दी ही ठोस कदम उठाने होंगे वरना बाद में हमें पछताना पड़ेगा।

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