10 lines on हवामहल

राजस्थान में बहुत सारे पर्यटन स्थल है जिनमे से हवामहल भी एक है। हवामहल अपनी बनावट और आकार के कारण दुनिया भर में फेमस है। हवामहल का निर्माण वर्ष 1799 में किया गया था।

hawa mahal
हवामहल

10 lines on हवामहल (कक्षा 1-8)

1. हवामहल राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित है।

2. हवामहल का निर्माण वर्ष 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह (1778-1803) ने करवाया था।   

3. हवामहल का मतलब होता है “ऐसा महल या स्थान जहाँ चारों तरफ से हवा आती है”। हवामहल को “Place of Winds” भी कहा जाता है।

4. भगवान श्री कृष्ण को समर्पित हवामहल को वास्तुकार लालचंद उस्ता ने डिज़ाइन किया था।

5. हवामहल की डिज़ाइन भगवान कृष्ण के मुकुट के समान है क्योंकि राजा सवाई प्रताप सिंह भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे तथा सामने से देखने पर यह किसी मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देता है।

6. हवामहल में कुल 365 छोटी-बड़ी खिड़कियाँ है और 953 झरोखे है रानियां और राजकुमारियां इनमें से बाहर का नजारा देखती थी।

7. हवामहल अपनी डिज़ाइन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

8. हवामहल का निर्माण लाल और गुलाबी पत्थर से किया गया था।

9. हवामहल को देखने के लिए प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में विदेशी सैलानी यहाँ आते है।

10. हवामहल को इस प्रकार बनाया गया है कि यह सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है।

10 lines on हवामहल (कक्षा 9-12 और कॉलेज)

1. जयपुर के राजा सवाई प्रताप सिंह जी को हवामहल बनाने की प्रेरणा राजस्थान के झुंझुनू जिले के खेतड़ी शहर में स्थित हवामहल से मिली थी।

2. हवामहल पांच मंजिला एक पिरामिड नुमा आकृति में बना हुआ है जिसकी कुल ऊंचाई 87 फीट है।

3. हवामहल में प्रवेश करने के दो द्वार है। मुख्य द्वार का नाम आनंद पोली है और दूसरे द्वार का नाम चन्द्र पोली है।

4. हवामहल की प्रत्येक मंजिल पर एक मंदिर स्थित है। अत: इसमें कुल पांच मंदिर है पहली मंजिल पर – शरद मंदिर, दूसरी मंजिल पर – रतन मंदिर, तीसरी मंजिल पर – विचित्र मंदिर, चौथी मंजिल पर – प्रकाश मंदिर, पांचवी मंजिल पर – हवा मंदिर।

5. हवामहल की पांचवी मंजिल को छोड़कर नीचे की चार मंजिलो पर आने जाने के लिए एक भी सीढी नही है बल्कि यहाँ रैंप (ढलान वाला रास्ता) बना हुआ है ताकि व्हील चेयर के द्वारा चलने में असमर्थ लोगो को ऊपर ले जाया जा सके। उस ज़माने में व्हील चेयर चन्दन की लकड़ी की बनी होती थी।   

6. हवामहल का निर्माण राजकुमारी और रानियों के बैठने के लिए किया गया था ताकि वे यहाँ से तीज, गणगौर और अन्य आयोजनों को देख सके क्योंकि उस ज़माने में पर्दा प्रथा थी।

7. हवामहल बिना नीव की ईमारत है इसे दुनिया में बिना नीव की सबसे बड़ी ईमारत माना जाता है।    

8. हवामहल की प्रत्येक मंजिल की छत की ऊचाई नीचे से ऊपर जाने पर घटती जाती है मतलब पहली मजिल की छत की ऊंचाई सबसे ज्यादा है और पांचवी मंजिल की छत की ऊंचाई सबसे कम है।               

9. हवामहल में आकाश-पाताल नामक सीमेंट की जालियां लगी हुई है। इनके द्वारा स्त्रियाँ अंदर से बाहर तो देख सकती थी लेकिन कोई भी व्यक्ति बाहर से अंदर नही देख सकता था।

10. हवामहल, सिटी पैलेस के द्वारा एक पतली गली से जुड़ा हुआ है। रानियाँ इसी रास्ते से हवामहल में आयोजन देखने के लिए जाती थी।

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