समाचार पत्र पर निबंध

कुछ वर्षों पहले तक केवल समाचार पत्र ही लोगों तक दैनिक न्यूज़ पहुँचाने का एक मात्रा जरिया था। लेकिन टेक्नोलॉजी के इस आधुनिक युग में समाचार पत्र का स्थान सोशल मीडिया और न्यूज़ वेबसाइट ने ले लिया है।

समाचार पत्र पर छोटे और बड़े निबंध [Short and Long Essay on News Paper in Hindi]

समाचार पत्र पर निबंध (300 शब्द)

किसी मशहुर लेखक ने कहा है “बिना समाचार पत्र वाला शहर, बिना आत्मा के शरीर के सामान होता है” समाचार पत्र या NEWS paper का मतलब होता है। जो हमें North, East, West और South की ख़बरों से अवगत करवाए। समाचार पत्र देश और दुनिया में होने वाली सभी प्रकार कि घटनाओं का मिला-जुला स्वरूप होता है। 

समाचार पत्र से हमें राजनितिक, सामाजिक, आर्थिक, साइंस, space, टेक्नोलॉजी और स्पोर्ट्स से जुडी सभी प्रकार कि खबरे हमें एक ही स्थान पर मिल जाती है। “समाचार पत्रों को ध्यान पूर्वक पढ़ने वाला व्यक्ति एक लाइब्रेरी में पढ़ने वाले स्कॉलर से ज्यादा ज्ञान हासिल कर सकता है”। समाचार पत्र से हमें सिर्फ खबरे ही नही मिलती बल्कि लोगों में जागरुकता भी लाई जा सकती है और तानाशाही सरकार को भी अपने फैसले बदलने पर मजबूर किया जा सकता है। वर्ष 1881 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने “केसरी” नामक समाचार पत्र शुरु किया था। भारत की आजादी के लिए युवाओ में जोश भरने और उन्हें अंग्रेजों के आंतक के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई थी।

इन्टरनेट के इस युग में आज भी समाचार पत्र ज्ञान प्राप्त करने का सबसे सस्ता जरिया है। समाचार पत्र में छपने वाले जाने-माने लेखको के लेख आईएएस जैसी एग्जाम पास करने वाले स्टूडेंट के लिए प्रेरणा का स्रोत है। लेकिन स्मार्ट फ़ोन के आने के बाद लोगों में समाचार पत्र पढने की रूचि ख़त्म हो गई है।

वर्तमान में भारत में 65% लोग 35 वर्ष के कम आयु के युवा है। इसलिए आज के समय समाचार पत्रों में खबरों के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार पाने से संबंधित जानकरी, बिज़नेस करने के तरीके, फाइनेंस से संबंधित जानकारी, स्पोर्ट्स के प्रति प्रेरित करने वाली जानकारी और समाज से संबंधित ज्ञानवर्धक जानकारी भी शामिल करनी चाहिए।

निबंध 2 (600 शब्द)

प्रस्तावना

भारत की आजादी के लिए अंग्रेजों के साथ संघर्ष के दौरान बहुत सारे स्वतंत्रता सेनानी जेलों में बंद थे लेकिन उन्होंने समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के द्वारा लोगों को लगातार प्रेरित किया और अंत में पुरे भारत ने एक साथ मिलकर अंग्रेजों को खदेड़ दिया। “एक कलम, तलवार से भी अधिक शक्तिशाली होती है” महान लेखक Edward Bulwer-Lytton कही गई ये बात बिल्कुल सही साबित हुई।

समाचार पत्र का प्रकाशन सबसे पहले अमेरिका में 17वीं शताब्दी में शुरु हुआ था। उससे पहले इतने बड़े स्तर पर सूचनाओ का प्रकाशन नही होता था। समाचार पत्र में हमें देश और दुनिया की राजनैतिक, भोगौलिक, स्पोर्ट्स और साइंस कि खबरे एक साथ मिल जाती है। समाचार पत्र बहुत प्रकार के होते है जैसे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, वीकली समाचार पत्र, मैगज़ीन, बिज़नेस समाचार पत्र आदि। भारत में सभी प्रकार की भाषाओं में मिलाकर रोजाना लगभग 30 करोड़ से अधिक समाचार पत्र प्रिंट किये जाते है।

एक समाचार पत्र अलग-अलग सेक्शन में विभाजित होता है और सभी सेक्शन में अलग-अलग खबरे जैसे राजनैतिक, बिज़नेस, फाइनेंस, क्राइम, मौसम, प्राकृतिक आपदा, स्वास्थ्य, साइंस, कंप्यूटर व टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट, समाज, फ़ूड और रेसिपी, कपड़े, फैशन, आर्ट्स आदि छपी होती है। समाचार पत्र के द्वारा हमें सरकार और बिज़नेस से संबंधित आगामी भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जानकारी मिलती है जिसके आधार पर हम पहले से ही तैयारी कर सकते है।

एक समाचार पत्र को चलने के लिए हजारो कार्यकर्ताओं कि जरुरत होती है जो दिन-रात देश और दुनिया में ग्राउंड पर जाकर सुचनाये इक्कठा करते है। ये कार्यकर्ता अपनी जान की परवाह किये बगैर सर्दी, गर्मी, बरसात, चुनावी रैली, बर्फबारी, बाढ़, भूकंप, युद्ध जैसी जगहों से भी सूचनाएं एकत्रित करते है।

किसी भी देश के चुनाव प्रचार में समाचार पत्र का बहुत बड़ा योगदान होता है। चुनाव में खड़े होने वाले कैंडिडेट का बायो डाटा, उसकी अच्छाई, बुराई और उस पर चल रहे केस के बारे में जानकारी भी समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँच जाती है।   

कुछ वर्षो पहले तक लोगों तक सुचनाये पहुचाने का समाचार पत्र ही एक मात्रा जरिया था। लेकिन टेक्नोलॉजी के विकास के कारण आज सभी समाचार पत्र ऑनलाइन आ गये है। जहाँ बहुत ही कम खर्चे में लोगों तक सूचना तुरंत पहुचाई जा सकती है जिस कारण लोगों ने समाचार पत्र पढ़ना बहुत कम कर दिया है। ऐसा लगता है जैसे आने वाली शताब्दियों में समाचार पत्र बंद भी हो सकते है। लेकिन आज भी दुनिया कि बहुत सारी आबादी ऐसी है जिसके पास मूलभूत आवश्यकताओ का सामान भी नही है। उन लोगों तक सुचनाये पहुचाने का समाचार पत्र ही सबसे सस्ता और अच्छा जरिया है।

समाचार पत्रों का इतिहास 350 साल पुराना है लेकिन आज भी इनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे है। समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाली खबरों में किसी एक पार्टी या पक्ष का प्रभाव अधिक दिखता है। बहुत सारे बिज़नेस मैन समाचार पत्र का प्रकाशन करते है और वह उसी दल का पक्ष लेते है जिससे उन्हें फायदा होता है।  

उपसंहार

समाचार पत्र की खबरों में निष्पक्षता होनी चाहिए। किसी भी लोकतांत्रिक देश में पक्ष और विपक्ष दोनों का होना बहुत जरुरी है। सत्ता में किसी भी एक पक्ष का अधिक पावर जनता में आक्रोश पैदा कर सकता है। समाचार पत्र ही एक ऐसा माध्यम है जो सुबह-सुबह प्रत्येक घर में देश और दुनिया कि खबरे पहुचाता है।

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