Phd full form in hindi | Phd फुल फॉर्म

Phd full form in hindi : क्या Phd करने के लिए M.Phil करना जरुरी है? Phd करने के लिए किस एग्जाम को पास करना होता है।

Phd किसी भी subject की उच्चतम स्तर की शिक्षा है। अगर आप किसी subject में Phd करते है तो इसका मतलब आप उस subject के expert है। Phd करने वालों को information creator कहा जाता है।

आपने देखा होगा की कुछ लोगों के नाम से पहले Dr. लगा हुआ होता है, कैसे? Phd करने के बाद आपके नाम के पहले Dr. (डॉक्टर) लग जाता है। Phd करने के लिए आपके पास कौन-कौन से योग्यता होनी चाहिए।

Phd full form in hindi

Phd की फुल फॉर्म “Doctor of Philosophy” होती है। Phd किसी भी subject में यूनिवर्सिटी द्वारा दी जाने वाली highest डिग्री होती है।

Phd की डिग्री आपको तभी दी जाती है जब आप कुछ नया खोजते है।

Phd के लिए qualification क्या होनी चाहिए?

Phd करने के लिए आपको अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी करनी पड़ती है। जिस विषय में आपने अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की है हो सके तो उसी विषय को Phd के लिए चुने इससे आपको बहुत आसानी होती है, क्योंकि आप उस विषय के बारे में पहले से ही थोड़ा बहुत ज्ञान होता है।

वो सभी subject जिनमें मास्टर डिग्री की जा सकती है, उनमें आप Phd भी कर सकते है।

Phd में एडमिशन के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद आपको UGC NET का एग्जाम पास करना होता है। इस एग्जाम के बारे में आगे पूरी detail में बताया गया है।

UGC NET पास करने के बाद कुछ कॉलेज जो Phd करवाते है। अपने स्तर पर एग्जाम लेते है जैसे Delhi University और JNU (jawaharlal nehru university) उसको पास करने पर आपको उस कॉलेज में एडमिशन मिल जाता है।

कुछ यूनिवर्सिटी सिर्फ UGC NET एग्जाम पास करने पर सीधा ही Phd में एडमिशन दे देती है।

पोस्ट ग्रेजुएशन में SC, ST तथा OBC स्टूडेंट के लिए कम से कम 50% और general स्टूडेंट के लिए कम से कम 55% अंक होने चाहिए तभी आपको Phd के लिए एडमिशन मिलेगा।  

Phd करने में कितना समय लगता है? (Phd course duration)

Phd course duration तीन साल का होता है, अगर आप 3 साल में अपनी थीसिस पूरी नहीं कर पाते तो आपको अधिकतम 7 साल तक इसे पूरा करना होता है।

आपको अपना प्रोजेक्ट या थीसिस (thesis) submit करना होता है, तभी आपको Phd की डिग्री मिलेगी वरना नहीं। 

Phd की फीस कितनी है?

UGC NET एग्जाम में जो स्टूडेंट टॉप करते है उनको NET-JRF (Junior Research Fellowship) मिलती है। यह एक scholarship (स्कॉलरशिप) है जिसके अंतर्गत स्टूडेंट को हर महीने 25 से 30 हजार रुपए मिलते है।

Phd की फीस सभी यूनिवर्सिटी की अलग-अलग होती है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी की बजाय सरकारी यूनिवर्सिटी में फीस काम लगती है।

M.Phil क्या होता है? Phd करने से पहले M.Phil करना जरुरी है क्या?

M.Phil की फुल फॉर्म होती है “Master of Philosophy” आप इतना समझ लीजिये की M.Phil, Phd का ही छोटा रुप होता है। M.Phil एक साल की होती है जबकि Phd 3 साल से लेकर 7 साल के बीच में पूरी करनी होती है।

कुछ यूनिवर्सिटी RET एग्जाम conduct करवाती है जिसका फुल फॉर्म होता है Research Entrance Test । इस एग्जाम में जिसके ज्यादा मार्क्स आते है उसको Phd में एडमिशन मिल जाता है और जिसके काम मार्क्स आते है उसको M.Phil में एडमिशन मिल जाता है।

Phd करने के लिए M.Phil करना जरुरी नहीं है क्योंकि कुछ यूनिवर्सिटी ही है जो Phd करवाने के लिए M.Phil की डिग्री मांगती है सब नहीं।

M.Phil रिसर्च करने कि प्राथमिक सीढ़ी मानी जाती है जबकि Phd उच्चतम स्तर कि रिसर्च होती है।

Master of Philosophy का मतलब होता है “दर्शन में मास्टर डिग्री” दर्शन का मतलब होता है किसी भी विषय के बारे में अपने विचार लिख कर प्रस्तुत करना। 

M.Phil में आपको 100 पेज की थीसिस (प्रोजेक्ट) लिखकर जमा करवाना होता है जबकि Phd में आपको 300-350 पेज की थीसिस लिखनी होती है।

M.Phil करने का फायदा यह होता है कि आपको थीसिस लिखने का ज्ञान हो जाता है। जिससे आपको Phd में आसानी होती है वरना Phd में आपको अपने प्रोफेसर की मदद लेनी पड़ती है जो की इतना आसान काम नहीं होता।

M.Phil में कुल 8 पेपर होते है यह दो सेमेस्टर में पूरा होता है। दोनों सेमेस्टर में चार-चार पेपर होते है।

राजस्थान यूनिवर्सिटी में M.Phil में फर्स्ट डिवीज़न बनाने के लिए आपको 65% अंक लाना आवश्यक होता है। जी हाँ 65% ना कि 60% ।

भारत की कुछ टॉप यूनिवर्सिटी है जो बिना M.Phil किये Phd में एडमिशन नहीं देती है।

Phd के कितने प्रकार होते है?

सामान्य तौर पर कॉलेज या यूनिवर्सिटी जो किसी विषय या टॉपिक पर रिसर्च करने का अवसर प्रदान करती है। उसके अलावा भी Phd के कुछ प्रकार होते है। मतलब कि कुछ अन्य क्षेत्र भी होते है जिनमें Phd करवाई जाती है। जैसे :

(i) Fellow Programme in Management (FPM)

अगर आप बिज़नेस के क्षेत्र में कुछ रिसर्च करना चाहते है तो आपको Fellow Programme in Management करना पड़ेगा। यह Phd IIM (Indian Institutes of Management) के द्वारा करवाई जाती है। भारत में वर्तमान में कुल 20 IIMs है।

बिज़नेस में रिसर्च का मतलब है कि जो डाटा मौजूद है उसके आधार पर भविष्य में बिज़नेस में आने वाले बदलाव का पूर्वानुमान लगाना और बिज़नेस करने के नए तरीके खोजना।

अगर आप इस FPM में Phd करते है तो यह आपके करियर के लिए अच्छा साबित हो सकता है क्योंकि आजकल बहुत सारी कंपनी है जो अपना बिज़नेस बढ़ाने के लिए बिज़नेस एक्सपर्ट को मोटी रकम देती है।

2. Doctorate in Pharmacy (Pharm D)

मेडिकल के क्षेत्र में हायर स्टडी के लिए Doctorate in Pharmacy की पढाई कर सकते है। इसके अलावा मेडिकल क्षेत्र में MBBS, Pharm B जैसे course भी उपलब्ध है।

3. Master of Philosophy (MPhil)

यह course Phd के समान ही है लेकिन यह सिर्फ एक साल ले लिए होता है। इसके बारे में विस्तार से हम आपको पहले ही बता चुके है।

Phd करने का प्रोसेस क्या है?

Phd का मतलब होता है कुछ नया discover करना। चलिए अब जानते है कि Phd रिसर्च में क्या-क्या involve होता है।

  1. आप जिस subject में Phd कर रहे है उसमे पहले जो Phd हो चुकी है, उन सब के बारे में बेसिक study करना।
  2. इसके बाद अपने topic पर स्टडी करना और रिसर्च करना शुरु करना।
  3. एक थीसिस produce करना और अपने मेंटर (mentor) के साथ discuss करना।
  4. अंत में अपनी रिसर्च पूरी करना और फाइनल थीसिस के तौर पर submit करवाना।
  5. आपके द्वारा कि गयी रिसर्च पर viva voice एग्जाम देना या उसका प्रेजेंटेशन देना।

ये सारे स्टेप्स यूनिवर्सिटी और सब्जेक्ट के हिसाब से अलग-अलग हो सकते है लेकिन मुख्य तौर पर यही काम होता है। 

1. Phd का प्रथम वर्ष (First year of Phd)

Phd करने के लिए आपको ऐसा टॉपिक सेलेक्ट करना होता है जिसके बारे में आप कुछ नया खोज सके आप ऐसा कोई रिसर्च टॉपिक नहीं चुन सकते जिस पर पहले से किसी और ने Phd कर रखी हो।

फर्स्ट ईयर में आपको अपने Phd टॉपिक/सब्जेक्ट के बारे में पूरी जानकारी हासिल करनी होती है। आपको अपना सब्जेक्ट बहुत सोच समझकर चुनना होता है।

आपको यूनिवर्सिटी में अपना मेंटर (जो आपको गाइड कर सके) चुनना होता है। मेंटर का काम होता है आपको Phd की पूरी प्रोसेस समझाना और कैसे रिसर्च करना है, कैसे थीसिस (अपनी रिसर्च को पेपर पर लिखना) लिखनी है आदि।

आप जिस रिसर्च पर काम कर रहे है जरुरी नहीं है कि आपके मेंटर को उसके बारे में कोई ज्ञान हो उसका काम आपको सिर्फ प्रोसेस के बारे में बताना होता है बाकि काम आपको ही करना पड़ेगा।

अगर आपने M.Phil कर रखी है तो आपके लिए कोई प्रॉब्लम नहीं होने वाली फर्स्ट ईयर में।

2. Phd का द्वितीय वर्ष (Second year of Phd)

द्वितीय वर्ष में आपको अपनी core रिसर्च करनी होती है। अपने experiment के आधार पर या सर्वे के आधार पर पर आपको अपनी base लाइन तैयार करनी होती है।

अपनी रिसर्च के आधार पर आपको अपनी थीसिस लिखना शुरु करना होता है और नियमित तौर पर आपको अपने मेंटर से भी परामर्श करना होता है।

3. Phd का तृतीय वर्ष (Third year of Phd)

तृतीय वर्ष में आमतौर पर आपको अपनी थीसिस पूरी करने का काम करना होता है।

आमतौर पर यह Phd का फाइनल ईयर होता है जिसमे आपको अपनी थीसिस को dissertation के रुप में बदलना होता है।

यह काम जितना आसान लगता है उतना होता नहीं है इसके लिए आपको खूब मेहनत करनी होती है।

final सबमिशन से पहले आपको अपनी थीसिस अपने मेंटर को दिखानी होती है जिससे उसमे कोई कमी हो तो उसे दूर किया जा सके।

Phd के दौरान आपको अपने जूनियर को पढ़ाने का मौका भी मिल सकता है। इसके अलावा अपने टॉपिक के बारे में प्रेजेंटेशन देने का, किसी मैगज़ीन (पत्रिका) में होनी रिसर्च को पब्लिश करने का भी मौका मिल सकता है।

Phd full form in hindi

Phd कौन-कौन से subject में कर सकते है?

1. Biological & Medical Sciences

  • Agricultural Sciences
  • Biochemistry
  • Bioinformatics
  • Biomedical Engineering
  • Biophysics
  • Biotechnology
  • Botany / Plant Science
  • Cancer / Oncology
  • Cardiovascular Science
  • Cell Biology / Development
  • Dentistry
  • Ecology & Conservation
  • Endocrinology
  • Evolution

2. Chemical Sciences

  • Agricultural Chemistry
  • Analytical Chemistry
  • Biochemistry
  • Chemical Engineering
  • Chemical Toxicology
  • Computational Chemistry
  • Electrochemistry
  • Environmental Chemistry
  • Food Chemistry
  • Forensic Science
  • Geochemistry
  • Inorganic Chemistry
  • Macromolecular Chemistry
  • Materials Science
  • Organic Chemistry
  • Pharmaceutical / Medicinal Chemistry
  • Physical Chemistry
  • Synthetic Chemistry

3. Physical Sciences

  • Applied Physics
  • Astrophysics
  • Atmospheric Physics
  • Atomic Physics
  • Biophysics
  • Condensed Matter Physics
  • Fluid Dynamics
  • Geophysics
  • Low-temperature Physics
  • Materials Science
  • Medical / Biomedical Physics
  • Metrology
  • Nuclear Physics
  • Optical Physics
  • Particle Physics
  • Plasma Physics
  • Quantum Physics
  • Radiation
  • Semiconductors
  • Solid state Physics
  • Theoretical Physics

4. Earth Sciences

  • Agronomy & Soil Science
  • Atmospheric Physics
  • Climatology & Climate Change
  • Ecology & Conservation
  • Ecotoxicology & Pollution
  • Environmental Chemistry
  • Environmental Engineering
  • Environmental Science
  • Geochemistry
  • Geography
  • Geology
  • Geophysics
  • Hydrology
  • Meteorology
  • Oceanography
  • Palaeontology

5. Engineering

  • Acoustics
  • Aeronautical, Maritime and Transport Engineering
  • Biomedical Engineering
  • Chemical Engineering
  • Civil & Structural Engineering
  • Electrical & Electronic
  • Energy
  • Environmental Engineering
  • Manufacturing
  • Materials Science
  • Mechanical Engineering
  • Nanotechnology
  • Nuclear Engineering
  • Petrochemical Engineering
  • Semiconductors
  • Software Engineering
  • Telecommunications

6. Maths & Computing

  • AI & Machine Learning
  • Applied Mathematics
  • Bioinformatics
  • Computational Chemistry
  • Computer Science & IT
  • Data Analysis
  • Information Science
  • Mathematics
  • Operational Research
  • Software Engineering
  • Statistics

Phd करने के बाद job scope क्या है?

Phd करने के बाद आपके पास बहुत सारे करियर के विकल्प खुल जाते है। जैसे

Phd करने के बाद आप किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में lecturer के पद पर कार्य कर सकते है। बहुत सारी गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी है जो समय समय पर Phd होल्डर को टीचिंग के लिए जॉब देती है।

इसके अलावा आप किसी रिसर्च या डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी काम कर सकते है। Phd के बाद आप सीनियर रिसर्च fellow बन सकते है। बहुत सारी प्राइवेट कंपनी है जो रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) प्रोसेस के लिए सीनियर रिसर्चर को hire करती है।

कुछ प्राइवेट कंपनी funded research प्रोग्राम के लिए भी Phd होल्डर को hire करती है आपको उस क्षेत्र में भी काम मिल सकता है।

इसके अलावा विदेशों में Phd होल्डर की काफी demand रहती है वहां आपको अच्छा पैसा मिलता है और working environment भी बढ़िया मिलता है।

Phd full form in hindi के इस लेख में हमने आपको Phd full form in hindi के अलावा Phd के के बारे में सारी जानकारी देने की कोशिश की है हमें उम्मीद है कि Phd full form in hindi में दी गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी

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One thought on “Phd full form in hindi | Phd फुल फॉर्म

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    भाई मैंने आपका पूरा आर्टिकल पड़ा एकदम मस्त आर्टिकल लिखा है आपसे । उम्मीद करते हैं आप ऐसे ही बेहतरीन आर्टिकल लिखते रहेंगे।

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